गुरु चरण वंदना

 

गुरु चरण वंदना

गुरु और शिष्य के बीच का पवित्र बंधन किसी समय या किसी दिन का मोहताज नहीं होता है। यह तो वो भावनाएँ हैं जो प्रत्येक क्षण सभी में अन्तर्निहित हैं, बस उन्हें उजागर करने का मौका कभी-कभी मिलता है।

ऐसा कहा जाता है कि जिनके जीवन में गुरु नहीं उनका जीवन शुरू नहीं। जिनके जीवन में गुरु के आशीर्वचन पलते हैं उन्ही के जीवन में आशीर्वचन फलते हैं।

ऐसे ही परम हितैषी गुरु ही परम दिव्य सुखद शीतल छाया का अनुभव करने, उनका व्याख्यान करने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ प्रतिभास्थली की सभी छात्राओं को गुरु पूर्णिमा के पावन शुभ अवसर पर।

सुन्दर प्रस्तुतियों के माध्यम से सुन्दर भावनाएँ प्रस्तुत कर छात्राओं ने गुरु गुणों का गुणानुवाद किया।

छात्राएँ गुरु की सन्निधि प्राप्त कर गुरु वंदना एवं गुरु की शरण में रहकर अत्यंत सूक्ष्म संवेदनाओं के साथ भाव विभोर हो उठीं।